ओम पर्वत उत्तराखंड | Om Parvat Uttarakhand

भारत की पावन भूमि अपने दैवीय आँचल में विभिन्न प्रकार के रहस्यों को समेटे हुई है, जिनके रहस्यों का भेद आधुनिक विज्ञान में उच्चतम स्तर की डिग्रियाँ प्राप्त कर चुके वैज्ञानिक आज तक पता नहीं कर सके। अत्यधिक प्रयासों के पश्चात भी वे यह नहीं जान सके हैं कि इनकी उत्पत्ति आखिरकार किस तरह हुई होगी। इनमें से कुछ पर्यटन के लिहाज़ से प्रसिद्ध हैं, तो कुछ अध्यात्मिक तौर पर विख्यात हैं। इस उल्लेख में हम एक ऐसे ही धार्मिक स्थल के बारे में जानकारी ग्रहण करने का प्रयास करेंगे, जिसके बारे में जानकार सभी लोग आश्चर्य से भर उठते हैं।

देव भूमि उत्तराखंड में, भारत और तिब्बत की सीमा पर समुद्र तल से 6,191 मीटर की ऊँचाई पर स्थित ओम पर्वत जिसे लिटिल कैलाश, बाबा कैलाश और जोंगलिंगकोंग के नाम से भी जाना जाता है, साक्षात ओम की आकृति लिए, निरंतर देव भूमि में महादेव की उपस्थित का विश्वास दिलाता है। भारत की ओर से पर्वत पर ’ऊँ’ की आकृति के दर्शन होते है और पर्वत का पृष्ठ भाग नेपाल की ओर से दिखाई पड़ता है।

पौराणिक हिन्दु मान्यताओं के अनुसार, विश्व भर में कुल 8 प्राकृतिक ओम की आकृतियाँ स्थित हैं जिनमें से अबतक सिर्फ़ ओम पर्वत की ही आकृति के बारे में मनुष्यों को जानकारी प्राप्त हो सकी है। बर्फ़ गिरने पर इस दिव्य पर्वत के ऊपर प्रतिवर्ष ओम की आकृति निर्मित होती है जिसके दर्शन हेतु दूर-दूर से श्रद्धालुओं का आगमन होता है। प्रचलित मान्यताएँ इसे चमत्कार बताती हैं, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि स्वयं महाकाल शिव यहाँ विराजमान हैं। ओम पर्वत कैलाश पर्वत-मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नाभि ढांग शिविर के पास स्थित है।

‘ओम’ के प्राकृतिक गठन के साथ इसकी सुंदरता और आध्यात्मिक प्रमुखता हृदय को मोह लेने की क्षमता रखती है एवं मनुष्य का ईश्वर से गहरा संबंध स्थापित करती है। ओम शब्द के उच्चारण मात्र में एक शक्तिशाली अर्थ के साथ एक अत्यंत प्रभावशाली दिव्य आभा होती है और यह हिंदु परंपराओं द्वारा विश्व की भेंट  किए गए पवित्र ग्रंथों का एक अनिवार्य तत्व भी है।

हिन्दु ग्रंथों के अनुसार ओम से ही सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी तथा संपूर्ण ब्राह्मण का निर्माण भी ओम की ध्वनि से ही हुआ था। इसमें एक रचनात्मक ऊर्जा का वास है और यह निरंतर विश्व भर में भक्तों के बीच इस तीर्थस्थल के बढ़ते प्रचार-प्रसार के प्रमुख कारणों में से एक है।यहाँ के पर्यटकों के सबसे पसंदीदा आकर्षण का उल्लेख करते हुए बताया जाता है कि वे जोंगलिंगकोंग झील और पार्वती झील हैं। 

पवित्र मानसरोवर झील की तरह, जोंगलिंगकोंग झील में भी वैसी ही भक्ति और पवित्रता है, विशेष रूप से हिंदु धर्म से संबंधित तीर्थयात्रियों के लिए। अगर आप सबसे कठिन इलाकों में से एक कैलाश मानसरोवर यात्रा में हैं, तो आप अपने रास्ते के बीच में ओम पर्वत को विशेष रूप से इसके ठीक नीचे स्थित लिपुलेख दर्रे के अंतिम शिविर से देख सकेंगे। ऐसा माना जाता है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा इस पवित्र शिखर यानी ओम पर्वत के दर्शन के बिना पूरी नहीं होती है।

ओम पर्वत (om parvat) जिसके बारे में ऐसा कहा जाता है की जब भी यहाँ बर्फ गिरती है तब ओम पर्वत से ओम शब्द का उच्चारण होता है। ओम पर्वत की चोटी तक पहुँचने के लिए ट्रेक के माध्यम से पहुँचा जाता है। भगवान शिव के भक्त व श्रद्धालु इस चोटी तक पहुँचते है और एक मील दूर से ही भगवान शिव के इस अद्भुत ओम पर्वत के दर्शन करते हुए वापस लौट जाते हैं।

ओम पर्वत की इस चोटी पर पहली बार ब्रिटिश व भारतीय पर्वतरोहियों की एक टीम गई थी। लेकिन खराब मौसम के कारण इस दल को 660 मीटर से ही वापस लौटना पड़ा। सन् 2008 में एक और दल ओम पर्वत पर चढ़ाई के लिए गया। परंतु ओम पर्वत के धार्मिक व आर्थिक महत्तव को समझते हुए उस दल को वापस लौट आने का आदेश दे दिया गया।

ओम पर्वत (om parvat) की यात्रा का समय प्रतिवर्ष अप्रैल से जून और सितम्बर से अक्टूबर के बीच का होता है। वर्षा के समय यात्रा करना उचित नहीं माना जाता क्योंकि इस समय पर्वतों में भूस्खलन का खतरा बना रहता है। इस पर्वत की परिक्रमा बहुत ही दुर्गम स्थलों से गुज़रते हुए पूरी होती है। इसका कारण है कि ओम पर्वत मार्ग बहुत ऊँचाई पर होने की वजह से बर्फ़ से ढका रहता है।

परंतु ऐसी कठिनाइयों के होने के पश्चात भी यहाँ आने वाले श्रद्धालु तीर्थयात्रियों की संख्या में हर वर्ष उत्थान ही होता है। इस यात्रा के लिए कुछ अनिवार्य औपचारिकताएँ पूर्ण करने की आवश्यकता होती है, उदाहरण स्वरूप- यात्रा करने के लिए परमिट की आवश्यकता होती है।  परमिट प्राप्त करने के पश्चात गुंजी तक यात्रा होती है जिसके बाद जौलिंगकोंग के लिए आगे की यात्रा प्रारंभ की जा सकती है।

जौलिंगकोंग से आदि कैलाश और पार्वती सरोवर थोड़ी ही दूरी पर स्थित है। यह संसार की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक माना जाता है, हर वर्ष यहाँ श्रद्धालुओं की शृंखला बढ़ती ही जाती है। इसके अतिरिक्त बुद्धिजीवी व पर्यटक भी प्रकृति की महिमा के दर्शन करने इस रोमांचक स्थान पर आते रहते हैं। इस ओम पर्वत पर आना अंतर्मन को असीम शाँति तथा सुख प्रदान करता है।

ओम पर्वत प्रकृति के चमत्कार की एक अद्भुत मिसाल है। यहाँ आने वाले यात्री इस स्थान से अन्नपूर्णा की विशाल चोटियों को भी देख सकते हैं।यह स्थान धारचूला के निकट है। ये चोटी हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध और जैन धर्म में भी विशेष धार्मिक महत्व रखती है। हर भारतीय को देश में स्थित इस अद्भुत प्राकृतिक चमत्कार के दर्शन करने ही चाहिए।

पर्वतों से निकलती नदियाँ, अतिसुंदर झरने, अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत करते हैं तथा ओम पर्वत की तीर्थयात्रा के आनंद को बढ़ाते हैं। इस लेख में हिमालय की गोद मे समाए इस पवित्र स्थल का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस दिव्य पर्वत से संबंधित पर्याप्त जानकारी दिए गए उल्लेख के माध्यम से पाठकों प्राप्त हो सकेगी।

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