Kausani Uttarakhand | जानिए उत्तराखंड के कौसानी को क्यों कहते हैं- प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल

उत्तराखंड राज्य इतना खूबसूरत है कि वहां जाने वाले लोगों को वापस आने का मन ही नहीं होता है। ऐसा लगता है मानो वहां कोई चुंबकीय शक्ति है, जो सभी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

वहां की बर्फीली पहाड़ियां, नदियां, झरने, धार्मिक स्थल, पर्यटन स्थल, आदि इतने खूबसूरत हैं कि वहां से वापस आने का मन ही नहीं होता है। और हो भी तो कैसे वहां जाकर तो मन बस एक ही गीत गुनगुनाता है, ये हसीं वादियां ये खुला आसमां आ गए हम कहां ओ मेरे साजना।

उत्तराखंड के विषय में ज्यादा क्या ही कहें और कम भी क्या कहें। वहां की बातें तो जब लेकर के बैठो तो बातों से भी मन नहीं भरता तो सोचिए जाने के बाद तो क्या ही हाल होगा। 

उत्तराखंड में चाहे बात बड़े बड़े धार्मिक स्थलों की हो जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री इत्यादि की और चाहे बात रोमांचक स्थानों की हो जैसे मसूरी, नैनीताल, अथवा औली आदि की हो, सभी स्थानों का अपना एक पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है।

उत्तराखंड की फूलों की घाटियां पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। उत्तराखंड की प्रकृति की गोद में इतने मंदिर तीर्थ स्थान समय है कि उत्तराखंड को देव भूमि भी कहा जाता है। यह कई देवी-देवताओं की जन्मस्थली है।

तथा न जाने कितने बड़े-बड़े ऋषि मुनियों कि यह तपस्थली है। कृष्ण द्वैपायन श्री वेदव्यास जी ने यहीं समस्त वेदों की रचना की है।

कौसानी, प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल

Kausani ( Natural Beauty in Uttarakhand )

प्रकृति से प्रेम करने वाले लोग जरा गौर से सुने भारत देश के उत्तराखंड राज्य में स्थित इस मिनी स्विट्जरलैंड के बारे में। जी हां कौसानी को भारत का, उत्तराखंड का ही नहीं केवल बल्कि भारत का मिनी स्विट्ज़रलैंड कहते हैं।

यदि आप नेचर लवर हैं तो कृपया करके ऐसी जगहों को बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें वरना बहुत कुछ मिस कर सकते हैं। कौसानी की खूबसूरती किसी विदेश से कम नहीं है।

यदि विश्वास ना हो रहा हो तो स्वयं ही जाकर देखें लें। कौसानी उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले में 6075 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन है।

यहां के बेशकीमती नजारों को देखते हुए इस स्थान को भारत का स्विट्जरलैंड कहा जाने लगा। कुछ स्थानों पर इसे कुमाऊं का स्वर्ग भी कहते हैं। यहां पहुंच कर आपको हिमालय की चोटियों का पूरा 350 किलोमीटर फैला हुआ नजारा एक ही साथ एक ही स्थान से देखने को मिल जाएगा।

कौसानी के मुख्य दर्शनीय स्थल

Kausani Uttarakhand

▪️रुद्रधारी फॉल्स: धान के खेतों तथा ऊंचे ऊंचे हरे-भरे देवदार के घने जंगलों के बीज सीढ़ीदार पहाड़ी में रुद्रधारी फॉल्स की शोभा अद्वितीय है। ऐतिहासिक कथाओं के अनुसार ये स्थान आदि कैलाश है।

इसी स्थान पर भगवान शिव तथा विष्णु भगवान का वास था। यह कौसानी के पास 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर ठंडे पानी का झरना काफी ऊंचाई से नीचे गिरता है। तथा यहां जाने का रास्ता बिल्कुल भी कठिन नहीं है।

▪️अनासक्ति आश्रम: इस आश्रम के निर्माण का उद्देश्य महात्मा गांधी को श्रद्धांजली अर्पित करना था। इस आश्रम को गांधी आश्रम भी कहते हैं। इस स्थान की सुंदरता तथा शांति से गांधी जी बहुत प्रभावित हुए थे।

यहां की खूबसूरती देखते हुए ही गांधी जी ने ही इसे स्विटजरलैंड नाम दिया था। इस आश्रम में एक अध्ययन कक्ष, पुस्तकालय, प्रार्थना कक्ष और किताबों की एक दुकान है।

▪️लक्ष्मी आश्रम: इस आश्रम की स्थापना सरलाबेन ने सन 1948 ई. में की थी। इसलिए ये आश्रम सरला आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। सरला बेन का असली नाम कैथरीन हिलमेन था। तथा बाद में ये गांधी जी की अनुयायी हो गई। इस आश्रम में लगभग 70 अनाथ तथा गरीब लड़कियां रहती है।

जो यहीं पर पढ़ाई करती हैं तथा पढ़ाई के साथ-साथ सब्जी उगाना, जानवर पालना, खाना बनाना आदि अन्य कार्यों को भी सीखती हैं। यहां एक वर्कशॉप है, जहां लड़कियां स्वेटर, बैग, दस्ताने, तथा छोटी चटाइयां आदि बनाती हैं।

▪️पंत संग्रहालय: हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म कौसानी क्षेत्र में हुआ था। यहां पर बस स्टैंड से थोड़ी ही दूरी पर उन्हीं को समर्पित करते हुए एक पंत संग्रहालय स्थित है।

ये वही स्थान है जहां पर उन्होंने अपना बचपन गुजारा था। अब उसी घर को संग्रहालय में परिणत कर दिया गया है। यहां उनके जीवन से संबंधित वस्तुएं, कविताओं का संग्रह, पुरस्कार, पत्र आदि को रखा गया है।

▪️कौसानी चाय बागान: जिन लोगों को चाय पसंद है तो आप टी एस्टेट जरूर जाएं। ये वो स्थान है जहां पर लोग खुद को कुदरत के बिल्कुल करीब महसूस करते हैं। इस स्थान पर चाय के बागान लगभग 210 हेक्टेयर एरिया तक फैले हुए हैं।

चाय के शौकीन लोगों के लिए तो यह जगह बिल्कुल कमाल की है। यहां पर तरह-तरह की चाय पत्तियां उगाई जाती हैं। यहां की सबसे बेस्ट चाय पत्ती है गिरियास टी की खेती। इसके अलावा यहां पर ऑर्गेनिक टी भी मिलती हैं।

कुछ चाय की पत्तियां तो यहां से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, तथा कोरिया तक निर्यात की जाती हैं।

निकटवर्ती स्थान

आपको बता दें कि कोट ब्रह्मरी दुर्गा देवी के भ्रमर अवतार को समर्पित मंदिर है, जो कि कौसानी से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर तेहलीहाट में स्थित है। देवी ने अपना भ्रमर अवतार अरुण नामक दैत्य के वध के लिए लिया था।

ऊंचे पर्वत पर विराजमान ब्रह्मरी देवी का मुख उत्तर की ओर है। अगस्त के महीने में यहां मेला लगता है, जो 3 दिनों तक चलता है। इन 3 दिन के मेले में ही भक्तों की भारी संख्या में भीड़ होती है।

गौरतलब है कि वैसे तो पहाड़ों की खूबसूरती को देखने के लिए आप किसी भी समय पर यहां जा सकते हैं लेकिन यदि यहां आप अच्छे से घूमने के लिए जाना चाहते हैं तो दिसंबर-जनवरी का महीना ज्यादा उचित रहेगा।

उन दिनों पहाड़ों में बेहद सुहावना मौसम रहता है। बर्फ के शौकीन लोग वह दिसंबर-जनवरी में पहाड़ों की सैर के लिए जाएं तो वे बर्फ का उचित तरह से आनंद ले सकते हैं।

अब बताइए भला ऐसा कौन ही होगा जो इतना कुछ सुनने के बाद भी कौसानी जाना नहीं चाहेगा। ऐसा कौन सा इंसान है जो चाय का शौकीन नहीं है, या फिर किताबों का शौकीन नहीं है, या बोले तो पहाड़, नदियां, झरने इन सबका शौकीन नहीं है।

मुझे तो नहीं लगता कि इस दुनिया में ऐसा भी कोई इंसान भी होगा जो प्रकृति की सुंदरता को एक बार अपनी खुली आंखों से  देखना नहीं चाहेगा। पहाड़ों की मंद सुगंधित हवा को महसूस नहीं करना चाहेगा।

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