जानिए उत्तराखंड में स्थित ‘Gurudwara Shri Hemkund Sahib’ के दिव्य और अलौकिक इतिहास के बारे में

उत्तराखंड केवल हिंदू धार्मिक स्थलों के कारण ही नहीं बल्कि सिखों के तीर्थ के लिए भी अति प्रसिद्ध है। वैसे तो उत्तराखंड में हिंदू धार्मिक स्थल जो कि बहुत ही प्राचीन एवं पौराणिक है, वहां मौजूद है।

चाहे फिर वह चार धाम हो (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, तथा यमुनोत्री) अथवा पंच प्रयाग हो (विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, करणप्रयाग, देवप्रयाग, व रुद्रप्रयाग)। उत्तराखंड अपनी फूलों की घाटियों की वजह से भी विश्व प्रसिद्ध है। सभी कहते हैं कि कश्मीर भारत का जन्नत है। जी हां बिल्कुल होगा लेकिन हम इस बात से बिल्कुल भी नहीं मुकर सकते हैं कि उत्तराखंड, कश्मीर से कम है। 

अगर आप कभी उत्तराखंड जाएं तो वहां की वादियों में थोड़ा वक्त तो गुजारिए फिर बतायिएगा। वहां जाकर के जो सुकून मिलता है वो दुनिया के किसी और कोने में नहीं है। उत्तराखंड बेहद खूबसूरत है। इतना खूबसूरत है कि वहां के बारे में बात करते-करते मन भरता ही नहीं है।

ऐसा लगता है बस थोड़ा कुछ और बोल दे वहां की प्रकृति के बारे में जिसने पूरे उत्तराखंड को अपनी गोद में ले रखा है। वहां चलने वाली नम सी हवा जब पहाड़ों से सोंधी सोंधी सी खुशबू ले करके उड़ती है न तब तो कहना ही क्या। मन करता है कि वहीं रुक जाए।

एक छोटा सा घर बनाकर रहने लगे फिर कभी वापस ना आए। ऐसी अद्भुत और अनोखी जगह है, उत्तराखंड। वहां पर धार्मिक स्थल अधिक होने के कारण इसे ‘देवभूमि, भी कहते हैं।

श्री हेमकुंड साहिब ( Gurudwara Shri Hemkund Sahib )

Gurudwara Shri Hemkund Sahib

उत्तराखंड में सिखों के दसवीं गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी की तपोस्थली श्री हेमकुंड साहिब स्थित है। सिखों की इस तीर्थ यात्रा को तीर्थों की सबसे कठिन यात्रा कहते हैं।

लगभग 15,200 फीट ऊंचे ग्लेशियर पर स्थित श्री हेमकुंड साहिब चारों ओर से हिमनदों से घिरा हुआ है। इन्हीं ग्लेशियरों या हिमनदों का ठंडा बर्फीला पानी जिस भी जल कुंड का निर्माण करता है उसे ही हम हेमकुंड अथवा बर्फ का कुंड कहते हैं

श्री हेमकुंड साहिब का इतिहास

हिमालय की गोद में स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब जी सिखों के सबसे पवित्र एवं प्रथम स्थानों में से एक माना जाता है। ये सिखों के दसवें तथा अंतिम गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी की तपोस्थली मानी जाती है ।

इस स्थान को वहां के स्थानीय निवासी बहुत असामान्य, पवित्र, विषमय तथा श्रद्धा माना जाता है। यहां पर एक झील स्थित है तथा इसके आसपास के क्षेत्र को  जिसके कारण लोग इसे एक  लोकपाल नाम से भी जानते हैं। लोकपाल का अर्थ होता है, निर्वाहक।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब की कुछ महत्त्वपूर्ण बातें

सिखों की निश्छल तथा अटूट आस्था के प्रतीक श्री हेमकुंड साहिब जोकि उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा लगभग 15200 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा पूरे 6 महीनों तक जब तक ठंड अपने चरम पर होती है तब तक बर्फ से ढका हुआ रहता है।

ये  अपने अद्भुत सुंदरता के लिए जाना जाता है। तथा ये स्थान भारत देश के सबसे महत्वपूर्ण गुरुद्वारों में से एक है। इस गुरुद्वारे के पास ही एक सरोवर स्थित है। इस पवित्र स्थान को अमृत सरोवर अथवा अमृत का तालाब कहा जाता है। ये अद्भुत सरोवर लगभग 400 गज लंबा और 200 गज की चौड़ाई में बना हुआ है।

इसके चारों ओर हिमालय की चोटियां है अर्थात यह स्थान हिमालय के साथ चोटियों से घिरा हुआ है। चोटियों का रंग वायुमंडल की स्थितियों के हिसाब से बदलता रहता है।

कुछ समय के लिए वे बर्फ जैसी सफेद तथा कुछ समय के लिए सुनहरे रंग की कभी लाल तो कभी-कभी भूरे रंग की दिखती हैं। इस पवित्र स्थान को रामायण काल  से ही यहां मौजूद माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि लोकपाल वही स्थान है, जहां श्री लक्ष्मण जी ने अपना मनभावन स्थान होने के कारण ध्यान पर बैठ गए थे।

ऐसी मान्यता है कि अपने पूर्व जन्म के अवतार में गोविंद सिंह जी भी ध्यान के लिए इस स्थान पर आए थे। गुरु गोविंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नामक नाटक में इस स्थान के बारे में अपने दिव्य अनुभव को उल्लेखित किया है।

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यह जगह दो से अधिक सदियों तक गुमनाम रही थी। गुरु गोविंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नाटक में इस स्थान के बारे में जब बात की तब ये स्थान सबकी नजरों मे आया।   


श्री हेमकुंड साहिब की स्थापना 

गुरु ग्रंथ साहिब के स्थापना सन 1937 में किया गया, जो कि आज दुनिया का सबसे अधिक माने जाने वाला गुरुद्वारा है। सन 1939 में संत सोहन सिंह जी ने अपनी मृत्यु से पूर्व हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के विकास का कार्य जारी रखने के मिशन को मोहन सिंह को सौंप दिया था।

श्री गोविंद धाम में इसकी पहली संरचना को मोहन सिंह जी के द्वारा निर्मित कराया गया था। इसके पश्चात सन 1960 में मोहन सिंह ने अपनी मृत्यु से पूर्व सात सदस्यीय कमेटी बनाकर इस तीर्थ यात्रा के संचालन की निगरानी दी।

आज भी ये कमेटी गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, जोशीमठ, श्रीनगर, गोविंद घाट, तथा गोविंद धाम में गुरुद्वारों के सभी तीर्थ यात्रियों के लिए भोजन तथा आवास की सुविधा उपलब्ध कराती है।

प्रमुख सिख तीर्थ स्थल, हेमकुंड साहिब

श्री हेमकुंड साहिब सिखों के प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक है। औपचारिक रूप से हेमकुंड साहिब को गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के रूप में जानते हैं। यह स्थान भारत की देवभूमि उत्तराखंड राज्य के खूबसूरत जिले चमोली जिले में स्थित है जो कि वहां एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।

इस स्थान पर न जाने कितने बड़े बड़े लोग कुछ समय बिताने आते हैं। यह करके उन्हें एक असीम सुख का महसूस होता है। इस स्थान पर सभी को दिव्यता का एहसास होता है। 

ये स्थान सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद जी (1666-1708) को समर्पित है जिसका जिक्र स्वयं गुरु जी ने दसम ग्रंथ में किया है।

सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार यह स्थान हिमालय पर्वत की सात चोटियों से घिरा हुआ एक हिमनद झील के साथ 4632 मीटर अर्थात् 15,197 फीट की ऊंचाई पर हिमालय में स्थित है।

ऐसे अलौकिक तथा दिव्य स्थान पर एक बार जाना जरूर जाना चाहिए। आखिरकार हिमालय की सात चोटियों से घिरा हुआ ये स्थान जहां पर मध्य में एक अमृत का कुंड भी मौजूद है।

जहां के पर्वत की चोटियां वायुमंडल की स्थिति के हिसाब से रंग बदलती है। कितना दिव्य होगा ऐसे स्थान पर जाकर स्वयं अपनी आंखों से यहां की प्राकृतिक सुंदरता का आस्वादन करने का।

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