देवभूमि के लोगों की आर्थिक तरक्की का आधार बना Homestay, लोग कमा रहे लाखों

भारतीय समाज में ‘अतिथि देवो भव:’ अर्थात् अतिथि को भगवान का दर्जा दिया गया है।

ऐसे में जब भी कोई अतिथि हमारे घर आता है, तो उसके आदर सत्कार में कोई कमी नहीं रहने पाए, इस बात का खास ख्याल रखा जाता है।

इतना ही नहीं घर आए मेहमानों को सदैव यही एहसास कराया जाता है कि वह अपने घर में ही मौजूद है, जहां उनकी हर जरूरत का ध्यान रखा जाएगा।


ठीक इसी तरह से, विदेशों या देश के भीतर ही अनेक राज्यों से जो लोग देवभूमि यानि उत्तराखंड घूमने आते हैं, उन्हें घर जैसा माहौल देने के लिए वहां होमस्टे (Homestay) की शुरुआत की गई है।

जिसके माध्यम से उत्तराखंड घूमने आए विदेशी मेहमानों और अन्य राज्यों के लोगों को बाहर भी घर जैसे माहौल का ही अनुभव कराया जाता है।

हालांकि भारत में अब होमस्टे का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन उत्तराखंड में ये अब आर्थिक प्रगति का आधार बन चुका है। जिसके बारे में आगे हम विस्तार से बात करने वाले हैं।


देवभूमि जिसे देवों की भूमि माना गया है। इसके प्राकृतिक सौंदर्य और वातावरण का लुफ्त उठाने के लिए देश से नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग बड़ी संख्या में यहां घूमने आते हैं।

इस दौरान जब कोई व्यक्ति यहां अपने परिवार या दोस्तों के साथ लंबी छुट्टियां बिताने के उद्देश्य से पहुंचता है। तब वह ठहरने या रुकने के लिए होटल या रिजॉर्ट की तलाश में रहता है।


जोकि कभी कभार काफी महंगे होते हैं और आपको वहां घर जैसी सुविधाएं या आराम नहीं मिल पाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए होमस्टे का चलन किया गया है।

जिसके माध्यम से व्यक्ति उत्तराखंड की संस्कृति और सभ्यता को भी बेहद करीब से जान पाता है।


यानि होमस्टे के द्वारा आप भारत के राजसी (Royal) और अमीर परिवारों से लेकर गांव तक के जीवन की पृष्ठभूमि का अनुभव कर सकते हैं।

कहने का तात्पर्य यह है कि होमस्टे एक तरह से देवभूमि में कई घरों और परिवारों द्वारा खोले गए स्टे सेंटर (Stay Centre) होते हैं,

जहां ठहरना या रुकना विदेश या अन्य राज्यों से आने वाले लोग होटल की तुलना में अधिक पसंद कर रहे हैं।


जिसका कारण यह है कि होमस्टे के दौरान पर्यटकों को लोगों के घरों में बतौर अतिथि बनकर रहने का मौका मिलता है।

इस दौरान वह भारतीय त्योहार और रीति रिवाजों को भी सीखते हैं, साथ ही परिवार के बीच रहकर अच्छा समय भी व्यतीत करते हैं।

होमस्टे के दौरान आपको भारतीय बंगलों, महलों, किलों, हवेली और कुटियों से लेकर साधारण से दिखने वाले घरों में भी ठहरने का मौका मिलता है।

इतना ही नहीं होमस्टे के दौरान आपको घर के भोजन का भी स्वाद चखने को मिलता है, जोकि होटल के खाने से लाख गुना स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है।

होमस्टे के माध्यम से उत्तराखंड घूमने आए लोगों को बतौर टूरिस्ट गाइड की भी सुविधा प्रदान की जाती है।


अब हम बात करते हैं कि उत्तराखंड में लिए शुरू की गई होम स्टे की सुविधा स्थायी निवासियों के लिए किस प्रकार लाभकारी है।

होमस्टे से उत्तराखंड के लोगों का रुका पलायन


उत्तराखंड की एक सबसे बड़ी समस्या है पलायन। आंकड़ों के मुताबिक राज्य के अस्तित्व में आने से अब तक लगभग 32 लाख लोगों ने राज्य से पलायन किया है।

अच्छी शिक्षा तथा रोजगार की तलाश में लोग अन्य राज्यों की तरफ पलायन करते हैं। इस प्रकार राज्य में बढ़ते लगातार पलायन को रोकने के उद्देश्य से होम स्टे योजना की शुरुआत की गई है।

जानकारों के मुताबिक, होम स्टे योजना के तहत कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) पलायन रोकने के प्रयास में लगा है।


बता दें, इस योजना के तहत हिमालय से जुड़े सभी ग्रामीण निवासियों को घर बैठे ही रोजगार दिया जा रहा है।

इसके साथ ही पलायन की मार झेलने वाले निवासी भी अब होम स्टे योजना के जरिए अपनी देवभूमि को त्यागने का विचार त्यागने लगें हैं।

होम स्टे योजना में सरकार लगातार नई सुविधाओं को जोड़ रही है ताकि पलायन को उन्नत स्तर पर रोका जा सके।

होमस्टे की देवभूमि में हुई शुरुआत


देवभूमि में होमस्टे योजना के शुभारंभ के पीछे का मूल उद्देश्य उत्तराखंड में आने वाले विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए साफ तथा किफायती स्थायी आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है।

उत्तराखंड में होमस्टे की योजना काफी लोकप्रिय है। उत्तराखंड के बड़े इलाके ही नहीं बल्कि छोटे गांवों तक होमस्टे की योजना ने बड़ी राहत पहुंचाई है। 


दरअसल, आज से 17 साल पहले मुनस्यारी में एक उद्यमी मल्लिका विर्दी द्वारा होमस्टे को व्यापार के तौर पर सरमोली क्षेत्र में शुरू किया गया था।

उस समय उत्तराखंड में होटल सीमित संख्या में मौजूद थे। जिसके कारण हिमालय तथा ग्लेशियर तक पहुंचने और ट्रैकिंग करने वाले पर्यटकों को ठहरने में काफी दिक्कतें होती थी।

ऐसे में मल्लिका वर्दी द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के समर्थन के साथ होमस्टे की शुरुआत की गई।


देखते ही देखते होमस्टे सुविधा की लोकप्रियता काफी बढ़ गई। जिसके चलते सरकार की ओर से भी होमस्टे योजना की ओर ध्यान दिया गया।

फिर सरकारी रूप से होमस्टे योजना का निर्माण हुआ। आज यह योजना उत्तराखंड में होने वाले पलायन को रोकने में भी मददगार साबित हुई है तथा वहीं ग्रामीणों को घर बैठे रोजगार भी मुहैया करा रही है।

होमस्टे से उत्तराखंड के निवासियों को मिल रहे ये लाभ


  • होमस्टे के जरिए उत्तराखंड के वीरान पड़े गांवों को फिर गुलजार कर दिया जाता है।
  • उत्तराखंड से भारी मात्रा में होने वाले पलायन को रोकने के उद्देश्य से शुरू की गई होमस्टे योजना, वास्तव में अपने उद्देश्य को पूरा करने में सफल हुए है।
  • होमस्टे की योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को अधिक तब्बजों प्रदान की जाती है, जिसके चलते स्थानीय ग्रामीण सीधे से इस योजना से लाभान्वित होते हैं।
  • होमस्टे की योजना में मिलने वाली घरेलू सुविधाओंं को विदेशों पर्यटकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है, साथ ही जिन जगहों पर अधिक संख्या में होटल मौजूद नहीं हैं, वहां होमस्टे मौजूद होने पर अब उत्तराखंड के पर्यटक कारोबार भी बढ़ेगा।
  • युवाओं से लेकर बढ़ती उम्र के उत्तराखंड निवासी भी इस योजना के तहत कमाने में सक्षम हुए हैं।• इस होमस्टे योजना ने उत्तराखंड की खूबसूरती को देखने और उत्तराखंड के इतिहास को जानने में बेहद बढ़ावा दिया है।


होमस्टे का बिजनेस शुरू करने के लिए आवश्यक शर्ते


यदि किसी भी स्थानीय निवासी द्वारा अपने घर को होमस्टे व्यापार में बदलकर लाभ कमाना है तो उसे निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है।

  • होमस्टे बिजनेस शुरू करने के लिए व्यक्ति का उत्तराखंड में जन्म लेना तथा निवासी होना अनिवार्य है।
  • आवदेक का अपना घर होना आवश्यक है तथा दो से अधिक कमरों का घर होना चाहिए।
  • आपको स्थानीय प्राधिकरण नगर निगम या नगरपालिका अपनी स्थानीय निवास को कमर्शियल कराना होगा।
  • जिसके बाद आपको अपने शहर के पुलिस डिपार्टमेंट से अनुमति प्राप्त करनी होगी।
  • इसके साथ ही आपको अग्नि विभाग से भी अनुमति लेनी होगी। अग्नि विभाग द्वारा इस बात पुष्टि की जाएगी कि आपका आवास अग्नि संकट से मुक्त है या नहीं।
  • पर्यटनों के लिए शुरू की जाने वाली इस योजना के लिए पर्यटन विभाग द्वारा अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • पर्यटन मंत्रालय द्वारा कुछ मापदंड भी सुनिश्चित किए गए हैं, जिनके आधार पर ही आपको सुविधा प्रदान करने का अधिकार प्राप्त होगा।
  • इसके साथ ही प्रस्तावित स्थान का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।• होमस्टे योजना के तहत छूट और रियायत शुरुआती तीन वर्षों तक प्रदान की जाएगी, इसके बाद जीएसटी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

उत्तराखंड सरकार द्वारा होमस्टे योजना को आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयास


होमस्टे की बढ़ती मांग और लाभ को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा इस योजना को अधिक लाभकारी बनाने के लिए पर्वतीय इलाकों में एक होमस्टे योजना की शुरुआत करने के लिए 10 लाख रुपए की सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है।

इस योजना के अन्तर्गत सरकार द्वारा 5 साल के ब्याज दर पर 1.5 लाख रुपए की छूट भी प्रदान की जाएगी।


हालांकि इस योजना का लाभ उत्तराखंड में रहने वाले तथा जन्म लेने वाले निवासी उठा सकते हैं। अतः यदि आप भी उत्तराखंड के निवासी हैं तो आप भी होमस्टे योजना के तहत लाभ उठा सकते हैं।

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