Asan Conservation Reserve- उत्तराखंड के आसन बैराज को मिली रामसर स्थल की उपलब्धि, प्रवासी पक्षियों को मिलेगा ठिकाना

भारत भूमि एक ऐसी धरा है, जहां का हर क्षेत्र प्रकृति व वातावरण के हितार्थ है। इसी के तहत भारत में प्रकृति की अनमोल देन उत्तराखंड राज्य मौजूद है। जिसे देवताओं की भूमि कहा जाता है। देश के एक खूबसूरत हिस्से के रूप में परिलक्षित होने वाला उत्तराखंड राज्य का आसन कंजर्वेशन रिजर्व पहला रामसर साइट बनने के लिए प्रस्तावित हो चुका है।

उत्तराखंड भूमि पर मौजूद आसन कंजर्वेशन रिजर्व को पहला रामसर स्थल का दर्जा मिला है। इस फैसले के बाद दुनिया के मानचित्र पर उत्तराखंड का आसन कंजर्वेशन रिजर्व उभर कर सामने आएगा। रामसर स्थल का दर्जा मिलने के बाद अब राज्य में पर्यटन को उन्नत स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।

आइए आज इस लेख के माध्यम से विस्तार यह जानने का प्रयास करते हैं कि आसन कंजर्वेशन रिजर्व के रामसर स्थल बनने से क्या लाभ होगा? तथा रामसर स्थल क्या है? 

आप में से अधिकतर लोग इस बात से अनभिज्ञ होंगे कि आखिर रामसर स्थल आयोजन क्या है? दरअसल, दुनिया में नम भूमि वाले क्षेत्रों को संरक्षण के लिए साल 1971 को ईरान में रामसर साइट की स्थापना की गई थी। जिसके तहत दुनिया की नम भूमि क्षेत्र को रिजर्व कंजर्वेशन की मान्यता प्रदान करके संरक्षण करने का सफल कदम उठाए जाते हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि दुनिया में नम भूमि के संरक्षण के लिए रामसर साइट को स्थापित किया गया है। 

आपको बता दें, रामसर सम्मेलन 1971, यूनेस्को द्वारा स्थापित एक अन्तर्राष्ट्रीय आद्रभूमि संधि है। यह सम्मेलन 1975 में कार्यवाई में दृष्टि में सामने आया था। इस प्रकार रामसर स्थल का अंतर्राष्ट्रीय महत्व है। भारत देश में रामसर साइट की संख्या अब 38 पहुंच चुकी है। जो कि पूरे साउथ एशिया में सबसे अधिक हैं।

हालांकि उत्तराखंड में पहली बार रामसर स्थल का चयन किया गया है। आसन कंजर्वेशन रिजर्व (आसन बैराज) पर अब देश के नहीं बल्कि विदेश के भी लोग नम भूमि से संबंधित विश्लेषण करने तथा पक्षियों की प्रजातियों का दीदार करने के लिए बड़ी संख्या में आ सकेंगे।

आसन कंजर्वेशन रिजर्व

उत्तराखंड में प्रवासियों की सबसे पसंदीदा जगह जाने वाली आसन कंजर्वेशन रिजर्व को साल 2005 अगस्त 14 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा देश को समर्पित किया गया था। यह उत्तराखंड की एक ऐसी जगह है जहां हर अक्टूबर के माह में प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है। यह प्रवासी पक्षियों का समूह साल के मार्च महीने तक डेरा डाले रहते हैं। इस स्थल पर यह प्रवासी परिंदे मध्य एशिया, चीन, रूस इलाकों समेत आदि स्थलों से पहुंचते हैं। 

आसन कंजर्वेशन रिजर्व (आसन वेटलैंड) सुर्खाब पक्षी का पसंदीदा स्थल है। इस पक्षी को अधिकतर लोग रूडी शेल्डक के नाम से भी जानते हैं। इसके साथ ही आसन कंजर्वेशन रिजर्व 444.40 हेक्टर भू भाग में फैला हुआ है। जहां हर वर्ष 54 से भी अधिक विदेशी प्रजाति के प्रवासी पक्षी आते हैं।

आद्रभूमि (वेटलैंड) क्या है? वेटलैंड को संरक्षित करने का कारण?

आद्रभूमि एक ऐसी भूमि होती है जहां स्थाई रूप से या फिर मौसमी तौर पर पानी भरा रहता है। जिस कारण उस स्थान की भूमि नम भूमि में परिवर्तित हो जाती है, इसके साथ ही यह अलग प्रकार की पारिस्थितिक रूप धारण कर लेती है। आद्रभूमि के अंतर्गत दलदली जमीन, बाढ़ वाले मैदान, मछली के तालाब तथा मानव द्वारा निर्मित आद्रभूमि शामिल है।

आद्रभूमि को संरक्षण करने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह भूमि सबसे अधिक उत्पादकता वाली है। इसके साथ ही इनका आर्थिक, सामाजिक तथा पारिस्थितिक महत्व अत्यधिक है। आद्रभूमि प्राकृतिक जैव विविधता के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसके अलावा आद्रभूमि पक्षियों तथा जीव जंतुओं की विलुप्त तथा दुर्लभ प्रजातियों, देशज पौधों तथा कीड़ों को आवास उपलब्ध कराती है।

भारत में वेटलैंड्स संरक्षण के लिए बनाए गए कुछ प्रमुख कानून निम्नलिखित हैं-

• प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम 1977,

• वन्य (संरक्षण) अधिनियम 1980,

• पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986,

• तटीय क्षेत्र विनियमन अधिसूचना 1991,

• वन्य जीवन संरक्षण संशोधन अधिनियम 1991,

• जैविक विविधता अधिनियम 200

• भारतीय मत्स्य अधिनियम 1857,

• भारतीय वन अधिनियम 1927,

• वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम 1972,

• जल (संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम 1974,

• समुद्रीय क्षेत्र अधिनियम 1976

वन विभाग की सफलता लाई रंग

साल 2005 में विकासनगर तहसील मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित आसन झील और उसके आसपास के इलाकों को आसन कंजर्वेशन रिजर्व स्थल के रूप में घोषित किया गया था। जो कि देश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व बना। बेहद लंबे समय से वन विभाग के अधिकारी द्वारा आसन कंजर्वेशन रिजर्व को रामसर साइट में शामिल किए जाने का प्रयास किया जा रहा था। फिलहाल उनकी मेहनत अब कहीं सफल होती नजर आईं है।

चकराता के वन प्रभाग डीएफओ अधिकारी दीपचंद आर्य ने यह जानकारी दी कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ ही वन विभाग की प्रबल कोशिशों के बाद आसन कंजर्वेशन रिजर्व को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हो सका है।

आसन कंजर्वेशन रिजर्व के रामसर साइट बनने से क्या होंगे फायदे?

रामसर साइट समझौता अथवा संधि सबसे पुराने सरकारी समझौतों में से एक है। जिसके सदस्यों ने आद्रभूमि यानि वेटलैंड क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित करने के उद्देश्य से हस्ताक्षर कर समझौता किया था। आसन कंजर्वेशन रिजर्व में हर साल सर्दियों के मौसम में पांच से दस हजार विदेशी पक्षी आकर डेरा डालते हैं। वेटलैंड्स भोजन, पानी, भूजल रिचार्ज, कटाव, नियंत्रण और पारिस्थितिकी तंत्र के लाभ को विस्तृत श्रृंखला प्रदान करते हैं। ऐसे में आसन बैराज पर पक्षियों को आवासीय सुविधा प्राप्त होगी।

इसी के साथ ही फिर दुनियाभर के पक्षी प्रेमी यहां पक्षियों को देखने तथा रिसर्च करने आएंगे जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी।

इस प्रकार उत्तराखंड का पहला बना आसन कंजर्वेशन रिजर्व वन विभाग के मुख्य अधिकारियों की मेहनत तथा सिफारिश का सफल परिणाम है। इसके अलावा यह प्रवासी की विलुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण में भी अहम भूमिका प्रदान करेगा।

आशा करते है आपको यह ज्ञानवर्धक जानकारी अवश्य पसंद आई होगी। ऐसी ही अन्य धार्मिक और उत्तराखंड संस्कृति से जुड़ी पौराणिक कथाएं पढ़ने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें।

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